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Saturday, January 5, 2019

इस लिए इजहार नहीं करती

हा ये बातहै
कि तुमसे बाते करना अच्छा लगता है,
अकसर खो जाती हु बाते करते करते।
मानो वक़्त जेसे ठमासा लगता है,
जन्नत सा लगता है  बात करते करते।
फिर भी मै तुमसे  प्यार नहीं करती.....
सीखा है तुम से
कि क्या है वजूद ए दिल आलम,
मुझसे खुद से मिलाया  है मुझे।
बेचेनी को कची नींद बताया,
फहरिस्ते से मिलाया है मुझे।
फिर भी मै तुमसे प्यार नहीं करती......
जानती हु मै
कि बहुत उचे खाब है तेरे,
हर वक़्त नये  मसले है तुमसे।
हम आजाद परिंदा है तेरे,
कसूर ए इश्क़ सीखा है तुमसे।
फिर भी मै तुमसे प्यार नहीं करती .....
लिया है वादा तुमने
कि मुझसे प्यार मत करना,
ना कभी बाधना इस बंधन से मुझे।
मै हूँ  आजाद परिंदा गगन का,
ना बाधना कभी बंधन से मुझे।
इस लिए इजहार नहीं करती.......

થા દિન


થા 'દિન' પથ્થર ને જો,
અહી આરામથી બેઠી.
તારી સુંદર પંક્તિ જો,
ત્યાં કવિતા થઈ બેઠી.
- દિન

Thursday, January 3, 2019

વિચારું છું


વિચારું છું,
તારી નજર રૂપી વાછટ આવી ભીનાશવાળી હતી,
તો તારો પ્રેમ રૂપી વરસાદ કેવો ધોધમાર હશે !
- દિન

किनारा


समंदर तूफान लाकर क्या ले जायेगा  ,

किनारा है हम, वापस उसे ही जाना होगा ।